केल्हारी मार्ग पर बस हादसे में 6 मौतें, करजी पटना मार्ग की दुर्घटना में 4 लोगों की गई जान; कांग्रेस जिलाध्यक्ष ने ओवरलोडिंग, फिटनेस और परमिट व्यवस्था पर उठाए सवाल
राजू खान><
कोरिया/छत्तीसगढ़। बैकुंठपुर जिले में लगातार हो रहे सड़क हादसों और इन दुर्घटनाओं में जा रही लोगों की जान ने सड़क सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष प्रदीप गुप्ता ने परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि जिले में वाहनों की जांच और यातायात नियमों के पालन को लेकर अपेक्षित सक्रियता नजर नहीं आ रही है। उन्होंने सवाल किया कि जब सड़कों पर नियमों की अनदेखी और वाहनों के संचालन में अनियमितताओं की शिकायतें सामने आ रही हैं, तो जिम्मेदार विभाग की निगरानी व्यवस्था आखिर कितनी प्रभावी है?
जिले में हाल ही में हुई दो बड़ी दुर्घटनाओं ने चिंता बढ़ा दी है। 22 अक्टूबर को केल्हारी मार्ग पर बस दुर्घटना में छह लोगों की मौत हो गई, जबकि इससे पहले 2 अक्टूबर को करजी पटना मार्ग पर ऑटो दुर्घटना में चार लोगों की जान चली गई थी। इन घटनाओं के बाद सड़क सुरक्षा, वाहनों की तकनीकी जांच और नियमों के पालन को लेकर विभागीय जवाबदेही पर चर्चा तेज हो गई है।
👉ओवरलोडिंग से लेकर फिटनेस तक, नियमों के पालन पर सवाल
प्रदीप गुप्ता ने आरोप लगाया कि जिले में निर्धारित क्षमता से अधिक यात्रियों को बैठाकर वाहन चलाने, स्कूली बच्चों को क्षमता से अधिक संख्या में ले जाने, वैध परमिट और फिटनेस प्रमाणपत्र के बिना वाहनों के संचालन तथा पिकअप वाहनों में क्षमता से अधिक सामान लादने जैसी शिकायतों पर गंभीरता से ध्यान देने की जरूरत है।
उन्होंने बिना नंबर प्लेट वाले वाहनों के संचालन और अवैध रेत उत्खनन एवं परिवहन पर नियंत्रण को लेकर भी निगरानी मजबूत करने की मांग की। उनका कहना है कि सड़क सुरक्षा केवल दुर्घटना के बाद राहत और कार्रवाई तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि संभावित खतरे को समय रहते पहचानकर रोकना भी जरूरी है।
👉हादसों के बाद नहीं, पहले सक्रिय हो विभाग
कांग्रेस जिलाध्यक्ष ने सवाल उठाया कि यदि वाहनों में क्षमता से अधिक सवारियां बैठाने, फिटनेस नियमों की अनदेखी और अन्य अनियमितताओं की शिकायतें सामने आ रही हैं, तो उनकी जांच और रोकथाम के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं? उन्होंने कहा कि परिवहन विभाग की जिम्मेदारी केवल कार्यालय तक सीमित नहीं है, बल्कि सड़कों पर वाहनों की जांच करना, नियमों का उल्लंघन करने वालों पर नियमानुसार कार्रवाई करना और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी उसके दायित्वों में शामिल है।
उन्होंने मांग की कि नियमित वाहन जांच, ओवरलोडिंग पर नियंत्रण, परमिट एवं फिटनेस प्रमाणपत्रों का सत्यापन और स्कूली वाहनों की सुरक्षा जांच को प्रभावी बनाया जाए, ताकि किसी बड़ी दुर्घटना की आशंका को समय रहते कम किया जा सके।
👉परिवहन विभाग की जवाबदेही तय करने की मांग
प्रदीप गुप्ता ने कहा कि लगातार हो रही दुर्घटनाओं के बीच परिवहन विभाग को अपनी कार्यप्रणाली और सड़क सुरक्षा के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए। विभाग को यह स्पष्ट करना चाहिए कि जिले में अब तक कितने वाहनों की जांच की गई, नियमों का उल्लंघन करने वालों पर क्या कार्रवाई हुई और भविष्य में दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए क्या कार्ययोजना तैयार की गई है।
👉आम लोगों की सुरक्षा सर्वोपरि, ठोस कार्रवाई की जरूरत
जिले में लगातार सामने आ रही दुर्घटनाओं ने सड़क सुरक्षा के प्रति प्रशासनिक सतर्कता की जरूरत को रेखांकित किया है। सवाल केवल दुर्घटना के बाद जिम्मेदारी तय करने का नहीं, बल्कि ऐसी व्यवस्था विकसित करने का है, जिसमें नियमों का पालन सुनिश्चित हो और यात्रियों की जान जोखिम में न पड़े।
>अब देखना होगा कि परिवहन विभाग इन सवालों पर क्या जवाब देता है और सड़क सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए जमीनी स्तर पर क्या कदम उठाए जाते हैं।
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