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साढ़े चार साल बाद भी नहीं मिला हाईवे अधिग्रहण का मुआवजा, पीड़ित ने कलेक्टर को भेजी अंतिम कानूनी चेतावनी

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मध्यस्थीय अवार्ड के बावजूद अटका मुआवजा, 7 दिन में भुगतान नहीं तो आंदोलन की चेतावनी हाईवे भूमि  

अधिग्रहण मुआवजा मामले में प्रशासन पर सवाल, पीड़ित ने दिया 7 दिन का अल्टीमेटम न्यायिक अवार्ड के बाद भी भुगतान लंबित, किसान ने प्रशासन को चेताया 








राजू खान :-

कोरिया/बैकुंठपुर। राष्ट्रीय राजमार्ग-43 (पुराना एनएच-78) भूमि अधिग्रहण मुआवजा मामले में साढ़े चार वर्ष बीत जाने के बावजूद भुगतान नहीं होने से परेशान ग्राम डुमरिया, तहसील पटना निवासी सुदीप कुमार गुप्ता ने जिला प्रशासन को अंतिम विधिक चेतावनी पत्र भेजते हुए सात दिनों के भीतर मुआवजा राशि का भुगतान करने अथवा भुगतान लंबित रखने का विधिसम्मत कारण बताने की मांग की है।

















आवेदन के अनुसार, राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना के तहत उनकी भूमि खसरा क्रमांक 3983 एवं 3984 का अधिग्रहण किया गया था। इस प्रकरण में 14 दिसंबर 2021 को सक्षम मध्यस्थ (Arbitrator) द्वारा उनके पक्ष में मध्यस्थीय अवार्ड पारित किया गया था, लेकिन अवार्ड जारी होने के बाद भी अब तक मुआवजा राशि का भुगतान नहीं किया गया।

पीड़ित का कहना है कि उन्होंने पिछले कई वर्षों में जिला प्रशासन, भू-अर्जन अधिकारी, लोक निर्माण विभाग, सूचना का अधिकार अधिनियम (RTI), प्रथम अपील, मुख्यमंत्री हेल्पलाइन तथा प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) सहित विभिन्न मंचों पर लगातार आवेदन देकर न्याय की गुहार लगाई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

आवेदन में उल्लेख किया गया है कि 9 जून 2026 को आयोजित जनदर्शन में उन्होंने कलेक्टर के समक्ष अपनी समस्या रखी थी, जहां 19 जून 2026 के बाद भुगतान कराने का आश्वासन दिया गया। इसके बाद 20 जून 2026 को पटना में आयोजित वृहद पंजीयन समाधान शिविर में भी उन्होंने मुआवजे के संबंध में जानकारी चाही, लेकिन उनके अनुसार न तो स्पष्ट जवाब मिला और न ही उनका आवेदन स्वीकार किया गया।

सुदीप कुमार गुप्ता का आरोप है कि उन्होंने स्थानीय विधायक भैयालाल राजवाड़े के माध्यम से भी अपनी मांग प्रशासन तक पहुंचाई, इसके बावजूद न तो मध्यस्थीय अवार्ड के अनुरूप भुगतान किया गया और न ही भुगतान रोके जाने संबंधी किसी सक्षम न्यायालय के स्थगन आदेश अथवा अन्य वैधानिक आधार की जानकारी उपलब्ध कराई गई।

अपने अंतिम विधिक नोटिस में उन्होंने प्रशासन को सात दिनों का समय देते हुए स्पष्ट किया है कि यदि निर्धारित अवधि में मुआवजा राशि का भुगतान नहीं किया गया या वैधानिक स्थिति स्पष्ट नहीं की गई, तो वे अपने संवैधानिक एवं कानूनी अधिकारों की रक्षा के लिए चक्का जाम एवं लोकतांत्रिक विरोध-प्रदर्शन के लिए बाध्य होंगे।

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