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दर्द से तड़पती रही महिला,,,डॉक्टर, नर्स ने टेहंग कर नहीं देखा, मौत के बाद किया रेफर,,, परिजन

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राजू खान:-
सूरजपुर/छत्तीसगढ़।सरकारीअस्पताल में डॉक्टरों की लापरवाही गर्भवती और होने वाले बच्चे की गई जान। शर्मसार करने वाली बात जब स्टाफ को पता चला कि प्रेग्नेंट महिला की मौत हो गई है,तो खुद को बचाने उन्होंने रात में ही बेहतर इलाज  का हवाला देते हुए बहाने से अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया।

मिली जानकारी अनुसार सूरजपुर जिले के पीढ़ा गांव की रेखा राजवाड़े पति तिलक 24 वर्ष नौ महीने की गर्भवती थी। बुधवार रात उसे प्रसव पीड़ा होने लगी।परिजन ने एंबुलेस बुलाई और रात 11बजे जिला अस्पताल सूरजपुर पहुंचे।

अस्पताल में रेखा को प्रसव कक्ष में ले जाया गया। उसे यहां न तो डॉक्टरों ने देखा और ना ही किसी नर्स ने जांच की। 
परिजनों ने कई बार डॉक्टरों के साथ नर्सो से गुहार लगाते रह गए पर किसी ने नहीं सुनी। सभी एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालते हुए पढ़रा झारते रहे । रात ढाई बजे आसपास रेखा बेहोश हो गई और फिर उसकी सांसें रुक गई।इसके बाद डॉक्टर और नर्स पहुंचे। 
जांच में मौत का पता चला,तो उसे आनन्न फानन में अंबिकापुर रेफर कर दिया।अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों ने बताया कि रेखा की मौत हो चुकी है परिजनों का मानो पैर तले से जमीन खिसक गई रो-रोकर बुरा हाल...
 
👉एबुलेंस नि:शुल्क सुविधा है इसके बाद भी ड्राइवर ने वसूले 800रूपये

गर्भवती की मौत के बाद भी तरस नहीं आई दलाली का खेल बंद नहीं हुआ। रेखा के ससुर शोभनाथ ने बताया सूरजपुर से अंबिकापुर लाने वाले एंबुलेंस के ड्राइवर ने उनसे 800 रुपए मांगे। सुबह 5 बजे रुपए देने के बाद उसने पीछा छोड़ा। जबकि सरकार की ओर से चलाए जा रहे एबुलेंस में गर्भवतियों को अस्पताल लाने या रेफर करने पर किसी तरह का शुल्क नहीं लगता है।

रेखा राजवाड़े को लेकर आई मितानिन सुगंती राजवाड़े से जानकारी अनुसार सूरजपुर अस्पताल में प्रसव पीड़ा से तड़प रही प्रसूता को कोई देखने नहीं आया। गार्ड को कहने पर भी उसने किसी डॉक्टर या नर्स को नहीं बुलाया। उल्टा गार्ड ने सलाह दी कि प्रसूता को ताकत लगाने को कहो,,,
मितानिन ने बताया- गार्ड ने नर्स को नहीं उठाया, कहा- प्रसूता को बोलो, ताकत लगाती रहेगी

रेखा के भाई गोपाल राजवाड़े ने बताया कि जिला अस्पताल सूरजपुर में 3 घंटे तक उसे रखा गया, लेकिन डॉक्टर इलाज करने नहीं आए। इसके बाद रेखा बेहोश हो गई। डॉक्टर ने बिना कुछ बताए अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल रेफर कर दिया। यहां डॉक्टर ने मौत पहले ही होने की बात बताई।

रेखा राजवाड़े का बेटा तीन साल का है। वह दूसरी बार प्रेग्नेंट हुई थी। घर में दूसरे बच्चे के आने को लेकर उत्साहित थे। घटना के बाद खुशियां मातम में बदल गई। रात 11 बजे हॉस्पिटल में डॉक्टर और नर्स आखिरकार एक दूसरे के ऊपर जिम्मेदारी क्यों सौंपते रहे क्या ऑन ड्यूटी मे वे नहीं थे,या फिर सोने मे मस्त रहे।

👉सवाल का जबाव सीएमएचओ नहीं दे सके। सूरजपुर सीएमएचओ डॉ. कपिलदेव पैकरा ने कहा कि वे फिलहाल कुछ नहीं बता पाएंगे। वे अस्पताल से जानकारी लेकर ही बता सकेंगे। एबुलेंस के ड्राइवर की बसूली पर भी चुप्पी साध ली।

👉हेल्थ ज्वाइंट डायरेक्टर डॉ. अनिल शुक्ला ने कहा कि, मामले की जांच कराई जाएगी। ऐसा सूरजपुर इलाके में दोबारा शिकायत आई है। मामले की जांच कराई जाएगी। कड़ी कार्रवाई होगी।
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