बेख़ौफ़ कलम , बेदाग़ सच... (राजू खान संपर्क - 8839314848)

Ticker

6/recent/ticker-posts

Ad Code

विज्ञापन हेतु संपर्क करें, राजू ख़ान (8839314848)

तीसरी बार बन रहा एनीकट, रेंजर साहब खुद खड़े होकर करवा रहे घटिया निर्माणवन विभाग में सरकारी पैसे की खुली लूट, जंगल की गिट्टी से हो रहा "लीपा-पोती"

Article Image
राजू खान :-
मनेंद्रगढ चिरमिरी भरतपुर/छत्तीसगढ़ के एमसीबी ज़िले के मनेंद्रगढ़ वन मंडल अंतर्गत आने वाले कुंवारपुर वन परिक्षेत्र एक बार फिर सुर्खियों में है, और इस बार वजह है भ्रष्टाचार की एक नई मिसाल। ग्रामीणों और स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं की शिकायतों के बावजूद वन विभाग के अधिकारी धड़ल्ले से नियमों को ताक पर रखकर निर्माण कार्य करवा रहे हैं, वह भी सरकारी धन की बर्बादी के साथ।

वन परिक्षेत्र कुंवारपुर के अंतर्गत कुदरा बीट स्थित बाघऊर नाले में पिछले डेढ़ साल में तीसरी बार एनीकट निर्माण कराया जा रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि हर बार करोड़ों रुपये खर्च कर निर्माण कार्य कराया जाता है, लेकिन गुणवत्ताहीन कार्य की वजह से एनीकट कुछ महीनों में ही ध्वस्त हो जाता है। इस बार भी वन परिक्षेत्र अधिकारी शिवप्रसाद ध्रुव स्वयं निर्माण स्थल पर खड़े होकर निर्माण कार्य करवा रहे हैं। सबसे हैरानी की बात यह है कि निर्माण में जंगल के पत्थर को तोड़कर गिट्टी बनाया गया है, जिससे साफ ज़ाहिर होता है कि विभागीय संसाधनों का दुरुपयोग कर निजी जेबें भरी जा रही हैं।

जब इस मामले की जानकारी मिलने पर मीडिया की टीम मौके पर पहुंची, तो रेंजर साहब शिवप्रसाद ध्रुव मीडिया को देखकर अपनी गाड़ी की ओर दौड़े और मौके से भाग निकले। इससे अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि अधिकारी को अपने काम पर कितना विश्वास है और पारदर्शिता कितनी है।

स्थानीय ग्रामीण रवि शंकर सिंह ने बताया कि “पिछले वर्ष भी इस नाले पर एनीकट बनाया गया था, जो कुछ ही महीनों में क्षतिग्रस्त हो गया। इस बार भी कोई सूचना पट्ट नहीं लगाया गया है और निर्माण में जंगल की गिट्टी और रेता का इस्तेमाल हो रहा है। न तो कार्य स्वीकृति बोर्ड लगा है, न ही गुणवत्ता की कोई गारंटी है। यह पूरी तरह से गोलमाल है।”

रवि शंकर सिंह ने आगे कहा, “हम लोग मांग करेंगे कि जांच कमेटी गठित की जाए और दोषियों पर कानूनी कार्रवाई हो ताकि भविष्य में गुणवत्तापूर्ण निर्माण हो और शासकीय धन की बर्बादी रोकी जा सके।”

जब यह शिकायत लेकर जनकपुर और भरतपुर के एसडीएम शशि शेखर मिश्रा से संपर्क किया गया, तो उन्होंने कहा, “मुझे आपके माध्यम से इस मामले की जानकारी मिली है कि बाघऊंर नाले में एनीकट निर्माण किया जा रहा है। यदि कार्य अनुमान पत्र के अनुसार नहीं हो रहा और उसमें गुणवत्ता की कमी पाई जाती है तो जांच कर कार्रवाई की जाएगी।”

इतनी गंभीर शिकायतों के बावजूद आज तक रेंजर शिवप्रसाद ध्रुव पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है, जिससे लोगों में यह आशंका भी बढ़ रही है कि भ्रष्टाचार की यह जड़ सिर्फ नीचे तक नहीं, बल्कि ऊपरी अधिकारियों तक फैली हुई है। जब निचले अधिकारी खुलेआम विभागीय संसाधनों से निर्माण कर रहे हैं और उनकी शिकायतों पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही, तो सवाल उठना लाज़मी है कि क्या उच्च अधिकारी भी इस गोरखधंधे में साझेदार हैं?

एक स्थानीय व्यक्ति ने कहा, "यह तो साफ है कि 'खाने वाले तैयार बैठे हैं, और परोसने वाले भी'। जब शिकायतें होती हैं और जांच अधिकारी आते हैं, तो उन्हें भी नोटों के तराजू में तोलकर वापस भेज दिया जाता है।"

मनेंद्रगढ़ वन मंडल का कुंवारपुर परिक्षेत्र अब भ्रष्टाचार का पर्याय बन चुका है। हर बार शिकायत के बाद केवल जांच की रस्म अदायगी होती है, लेकिन न तो अधिकारी निलंबित होते हैं, न ही निर्माण में सुधार होता है। लाखों रुपये के शासकीय धन की बर्बादी, और प्राकृतिक संसाधनों की अवैध लूट ने जनता का विश्वास तोड़ा है।

अब यह देखने की बात होगी कि क्या एसडीएम भरतपुर की जांच में सच्चाई सामने आएगी, या यह मामला भी अन्य मामलों की तरह फाइलों में दबा दिया जाएगा। फिलहाल, वन विभाग में भ्रष्टाचार का नंगा नाच जारी है, और जिम्मेदार अधिकारी चुप्पी की चादर ओढ़े बैठे हैं।



शेयर करें:
♦ इस खबर को आगे शेयर जरूर करें ♦