(मवई नदी हरचौका सीतामढ़ी सहित जनकपुर की अन्य सभी जीवनदायनी नदियों के रक्षार्थ)
वन, पशु,ग्रामीण,पर्यावरण सभी का भविष्य, जीवन संकटमय, जलस्तर में भारी गिरावट,,,,
कुआं,नदी,नाला, बोर, जीव, मनुष्य सबका अस्तित्व खतरे में,,,,,
किसी भी मानक में खरा नहीं उतरने पर भी खोदे जा रहे रेत,ग्रामीणों को गोली मार देने की धमकी,,,,
भारी जनसमूह ग्रामीण जनता जनहित संघ के केंद्रीय उपाध्यक्ष के नेतृत्व में सत्य के लिए आग्रह करने बैठे ‘रेत सत्याग्रह’ में,,,,,
राजू खान:-
एमसीबी/छत्तीसगढ़।एमसीबी-हरचौका –सीतामढ़ी।वायु– अग्नि– जल– पृथ्वी और नभ इन पंच महाभूतों द्वारा बने निर्मित प्रकृति में अगर किसी एक तत्व के साथ भी खिलवाड़ किया जाए तो संपूर्ण सृष्टि, जीव जंतु,वनस्पति सहित मानव समुदाय का विनाश होने से कोई नही रोक सकता। प्रकृति के साथ संतुलन अति आवश्यक है यह संतुलन थोड़ा भी डगमगाया तो परिणाम तुरंत दिखेगा जो भयंकर कष्ट कारी ही होगा। वर्तमान में ग्लोबल वार्मिंग,पारिस्थितिक असंतुलन,पर्यावरण जल मृदा वायु क्षरण और प्रदूषण, ओजोन परत में क्षय इन सबका कारण मानवीय प्रयोगात्मक अतिदोहन और संतुलन की कमी ही नजर आती है यह वैश्विक समस्या है लेकिन प्रत्येक मानव का यह धर्म होना चाहिए कि वो प्राकृतिक संसाधनों का अतिदोहन से बचे और पर्यावरण संरक्षण,संसाधनों के संरक्षण के प्रति जिम्मेदार बने ताकि आने वाला भविष्य संकटग्रस्त और मरणासन्न ना होकर स्वस्थ समाज का निर्माण कर सके इन्ही भावनाओ को आत्मसात करते हुए जनहित संघ अंतर्गत पण्डो विकास समिति ने विगत 2 मई दिन शुक्रवार को ग्राम हरचौका सीतामढ़ी में ग्रामीणों के अपार समर्थन के साथ अवैध रेत उत्खनन के विरोध में "रेत सत्याग्रह" किया जो लगातार कई दिनों तक चला प्रशासन ने अवैध रेत उत्खनन के विरुद्ध कार्यवाही करने का विश्वास दिलाया ग्रामीण अवैध रेत उत्खनन के विरोध में एकस्वर में आवाज उठाते दिखे। रेत सत्याग्रह शांतिपूर्वक सत्य के लिए आग्रह रहा जो जनहित संघ के केंद्रीय उपाध्यक्ष संवर्त कुमार रूप के नेतृत्व में प्रारंभ हुआ।
अवैध रेत उत्खनन के विरोध में रेत सत्याग्रह और कुछ प्रश्न:–
पंचायत स्तर के संपूर्ण प्राकृतिक संसाधनों का स्वयंभू ग्राम सभा का कोई अनुमोदन?ग्राम पंचायत के अधिकारों का हनन क्यों?प्रदूषण प्रबंधन हुआ?
क्या एनजीटी के नियमो के तहत पर्यावरण प्रबंधन किया?क्या मृदा क्षरण,जल प्रदूषण को रोकने कोई उपाय किया गया?आपने मानक स्तर से अधिक की खुदाई करके क्षति नहीं पहुंचाई? स्कूल,सार्वजनिक स्थान, छात्रावास के 50 मीटर के दायरे के बाहर,गांव के गली के 10 मीटर क्या छत्तीसगढ़ गौण खनिज रेत अधिनियम के तहत यह वैध है?खनन का भौतिक दायरा और नियम का पालन,निरीक्षण,सर्वेक्षण,वृक्षारोपण बहाली हेतु पुनर्वास कार्यक्रम हुआ?
क्या आपने जीव, वन, मनुष्य के भविष्य को संकट में नही डाला, पारिस्थितिक तंत्र, जैव विविधता पर प्रतिकूल प्रभाव,गिरता भू जलस्तर कुआं, तालाब,पोखर, बोर,नाला का अस्तित्व संकटमय,मानवीय संसाधन से परिपूर्ण पंचायत में पोकलेन का प्रयोग मशीनों का प्रयोग हेतु पर्यावरण से अधिमान्यता, ई आईए, एनजीटी,पांचवी अनुसूची, पेसा एक्ट, खान और खनिज के नियमो का परिपालन हुआ ? और भी कई बिंदु है जो सिद्ध करता है कि हरचौका सीतामढ़ी मवई नदी में हो रहा रेत का अतिदोहान उत्खनन पूर्णतः अवैध है। कुछ ग्रामीणों के अनुसार थोड़े से भाग का पट्टा प्राप्ति होने पर ठेकेदार और रेत माफिया पूरे नदी को 40 फीट गहरा खोद डाल रहे है।
पूर्व पंचायत पदाधिकारी की भूमिका संदिग्ध, प्रशासन ने कहा दूसरा प्रस्ताव करे पंचायत, नही होगा कोई उत्खनन
रेत सत्याग्रह के दौरान जनहित संघ के केंद्रीय उपाध्यक्ष एस. के.‘रूप’ और उनके पदाधिकारियों ने ग्रामीणों से चर्चा की जिसमे कई बिंदु निकल कर सामने आए वर्तमान सरपंच लालसाय ने बताया कि पूर्व सचिव और अन्य ने मिलकर ठेकेदारों से सांठ गांठ करके ग्राम सभा में प्रस्ताव पारित कर दिया था जो जनता के लिए मुसीबत का सबब बना। वहीं इस पुरे मामले में प्रशासन का कहना है कि पंचायत ने पूर्व में खुद अनुमति दे रखी थी उस अनुमति को खारिज करें और पंचायत में रेत उत्खनन नही होने को लेकर नवीन प्रस्ताव ग्राम सभा में पारित करें। उसके अनुसार कार्यवाही होगी। रेत सत्याग्रह के दौरान ग्रामीणों ने ग्राम सभा करके नवीन प्रस्ताव पारित करने जिसमे कम से कम 75 प्रतिशत जनता का समर्थन हो प्रस्ताव पारित करने का निर्णय लिया वर्तमान सरपंच ने व्यस्तता बढ़ेगी दिखाई और ग्रामीणों को मायूसी हाथ लगी जबकि सरपंच को ग्रामीण हित को सर्वप्रथम ध्यान देने की आवश्यकता थी फिर भी वर्तमान सरपंच भी अपने नैतिक जिम्मेदारी से भागते दिखे जो संदेहास्पद है।
गोली मार देने की धमकी और एफआईआर:–
इन सबके बीच रेत माफिया और इसके ठेकेदारों ने छत्तीसगढ़ के रेत को यूपी और एमपी में खपाने के साथ बिना किसी नियम और कानून के, पास भी केवल खुदरा, फिर भी ग्रामीणों को ही गोली मार देने की धमकी के साथ, कई ग्रामीणों के ऊपर एमपी में एफ आईआर और झूठे प्रकरण दर्ज कर दिए है।
जनप्रतिनिधियों का मौन और दुमुहा रवैया:–
अवैध रेत उत्खनन आज से नही हो रहा है है वर्षों पुरानी कहानी है। तब विरोध नही हुआ क्योंकि संसाधन अधिक था। जब अतिदोहन होने लगा और भयंकर परिणाम दिखने लगे तब ग्रामीण जागृत हुए लेकिन इसके पहले से ही एक तबका जागृत रहा और ठेकेदारों से सांठगांठ करके फलित पोषित हो रहा था। इधर कुछ जनप्रतिनिधि जो अक्सर रेत उत्खनन के विरोध में सामने दिखते है ग्रामीणों के अनुसार उनमें से कुछ पीछे से इन्ही ठेकेदारों को संरक्षित कर रहे है और उन्हें धन आदि द्वारा लाभान्वित हो रहे है। कुछ तो मौन है और पर्यावरण का विनष्टिकरण का दृश्य देख रहे है। ये मौन स्वीकृति क्यों है इसका कारण वे ही जाने।
रेत सत्याग्रह के दौरान जयचंद प्रवित्ति के लोगो से भी सामना हुआ। बहरहाल रेत सत्याग्रह में ग्रामीणों जनप्रतिनिधियों और स्थानीय निवासियों की सार्थक उपस्थिति रही। जनहित संघ का रेत सत्याग्रह एक ऐतिहासिक आंदोलन रहा जिसने हरचौका सीतामढ़ी मवई नदी सहित सम्पूर्ण चांगभकार जनकपुर की जीवनदायिनी नदियों के रक्षार्थ यह आंदोलन चलाया यह रेत उत्खनन की सम्पूर्ण शक्ति ग्राम सभा के शक्तिधिन संचालन पर जोर दिया। सत्याग्रह में एस.के.‘रूप’, सतीश मिश्रा, गणेश तिवारी, नंदलाल पण्डो,रामशरण पण्डो,जितेंद्र बैगा, रजनीश,बृजलाल पण्डो, राजकुमार यादव,बाबूराम बैगा,मुन्ना राम यादव, श्याम नारायण सिंह,अमित सिंह, घनश्याम अहिरवार, हरवंश लाल, बुधसेन बैगा,लालसाय सिंह,रोहिणी प्रसाद, सोनसाय पण्डो, मोहन पण्डो, सुखसेन पण्डो, बेला बाई, मीरा, लीलावती,राम अवतार कुशवाहा, कृष्ण कुमार मिश्रा,जगदीश बैगा,रामधनी, नान बाबू बैगा, श्याम नारायण,अरविंद,कुंवर बहादुर सिंह,पुष्पेंद्र पांडे,हीरालाल बैगा,अमरनाथ अहिरवार,राहुल पांडे, करण कुमार गुप्ता सहित भारी संख्या में ग्रामीण और जनहित संघ पण्डो विकास समिति के पदाधिकारी सदस्यगण मौजूद रहे।