राजू खान:-
कोरिया/छत्तीसगढ़।कोरिया बैकुंठपुर। जिला मुख्यालय बैकुंठपुर के तलवा पारा स्थित छिंदडाँड़ के दो मंजिला कर्मचारी आवासों में रह रहे दर्जनों परिवार नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं। 2005 में लोक निर्माण विभाग द्वारा बनाए गए इन सरकारी आवासों में नाली निर्माण न होने के चलते गंदा पानी हर ओर फैल चुका है। स्थिति इतनी भयावह हो गई है कि अब यह पानी सड़कों पर बहता हुआ बच्चों के खेलने के मैदान तक पहुंचने लगा है। अप्रैल की चिलचिलाती गर्मी में भी यहां ऐसा लग रहा है जैसे मानसून का मौसम आ गया हो।
गंदगी का अंबार, संक्रामक रोगों का खतरा
आवासों से निकलने वाला निस्तारी जल आसपास जमा हो चुका है। वर्षों से नियमित सफाई न होने और नाली निर्माण न होने की वजह से अब ये पानी स्थायी जलकुंड का रूप ले चुका है। मच्छरों का प्रकोप लगातार बढ़ रहा है और डेंगू, मलेरिया जैसे रोगों का खतरा मंडरा रहा है। स्थानीय निवासी लगातार इस गंदगी से परेशान हैं, लेकिन सरकारी तंत्र की उदासीनता के चलते उन्हें कोई राहत नहीं मिल पा रही है।
लोक निर्माण विभाग की अनदेखी, मेंटेनेंस सिर्फ कागजों पर
इन आवासों की देखरेख की जिम्मेदारी लोक निर्माण विभाग की है, लेकिन विभाग ने पिछले कई वर्षों से कोई ध्यान नहीं दिया है। रहवासियों के अनुसार, एनुअल मेंटेनेंस का कार्य सिर्फ कागजों में होता है, जबकि ज़मीनी स्थिति इसके ठीक विपरीत है। टूटी-फूटी सीढ़ियां, दरारों से भरी दीवारें और गिरते प्लास्टर इन आवासों की खस्ता हालत को बयां करते हैं।
टूटी हुई टंकियां, जर्जर पाइप – पीने के पानी की भी दिक्कत
ऊपरी मंजिल पर रखी पानी की टंकियां वर्षों से टूटी हुई हैं, जिनमें अब पेड़-पौधे उग आए हैं। इन टंकियों की सफाई और मरम्मत की किसी ने कभी सुध नहीं ली। वहीं, भवन निर्माण के समय लगे लोहे के पाइप भी अब जर्जर होकर जगह-जगह टूट गए हैं, जिससे रहवासियों को पानी की सप्लाई में भी लगातार परेशानी का सामना करना पड़ता है।
एक साल से फाइल पड़ी है दबे पन्नों में – सरपंच का आरोप
तलवापारा के सरपंच देवीदयाल ने बताया कि इस मामले को लेकर वे कई बार जिला प्रशासन और संबंधित विभाग को अवगत करा चुके हैं। नाली निर्माण हेतु तकनीकी स्वीकृति (टीएस) भी एक वर्ष पूर्व ही मिल चुकी है, लेकिन यह फाइल आज भी विभागीय टेबल पर धूल फांक रही है। सरपंच ने कहा कि वे लगातार प्रयास कर रहे हैं कि यहां के रहवासियों को इस नारकीय स्थिति से छुटकारा मिले।
प्रशासनिक उदासीनता से नाराज रहवासी
रहवासियों ने बताया कि उन्होंने कई बार लिखित और मौखिक रूप से शिकायत की, लेकिन उन्हें केवल आश्वासन ही मिला। उनका कहना है कि यदि कोई आम बस्ती होती तो6 शायद कब का सुधार कार्य हो चुका होता, लेकिन चूंकि ये सरकारी आवास हैं और रहवासी भी सरकारी कर्मचारी हैं, इसलिए कोई सुनवाई नहीं हो रही है।
क्या जिला प्रशासन जागेगा?
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कलेक्टर कार्यालय से महज़ कुछ कदमों की दूरी पर बसे इन आवासों की सुध प्रशासन कब लेता है। क्या गंदगी, बदबू, टूटी टंकियों और बहते पानी से जूझते इन कर्मचारियों को जल्द राहत मिल पाएगी, या यह समस्या यूं ही फाइलों में दबी रहेगी?