कोरिया/छत्तीसगढ़। कोरिया- जिले के ग्राम टेंगानी, बिलारो एवं कटोरा में मनरेगा के अस्तित्व को बचाने को लेकर जन चौपाल का आयोजन किया गया। कार्यक्रम कांग्रेस मंडल अध्यक्ष परेश सिंह के नेतृत्व में संपन्न हुआ। इस दौरान केंद्र की भाजपा सरकार पर मनरेगा को कमजोर करने के गंभीर आरोप लगाए गए।
जन चौपाल को संबोधित करते हुए मंडल अध्यक्ष परेश सिंह ने कहा कि मनरेगा की वैधानिक गारंटी को समाप्त करने का प्रयास ग्रामीण भारत की अर्थव्यवस्था को कमजोर करने और गरीबों के अधिकारों पर सीधा हमला है। उन्होंने कहा कि यह योजना केवल रोजगार का साधन नहीं, बल्कि ग्रामीण परिवारों को सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अधिकार देती है।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2005 में यूपीए सरकार द्वारा लागू किया गया महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) एक कानून है, जिसके अंतर्गत प्रत्येक ग्रामीण परिवार को 100 दिनों के रोजगार की कानूनी गारंटी दी गई है। साथ ही रोजगार न मिलने की स्थिति में बेरोजगारी भत्ता देने का भी प्रावधान है।
मंडल अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि वर्तमान केंद्र सरकार मनरेगा के ढांचे में बदलाव कर इसकी मूल भावना को समाप्त करने का प्रयास कर रही है। उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि पूर्व में मनरेगा के कुल खर्च का 90 प्रतिशत केंद्र सरकार वहन करती थी, जबकि राज्यों का हिस्सा मात्र 10 प्रतिशत था। नए प्रावधानों के तहत केंद्र का अंश घटाकर 60 प्रतिशत कर दिया गया है और राज्यों पर 40 प्रतिशत का अतिरिक्त बोझ डाल दिया गया है।
उन्होंने कहा कि अधिकांश राज्य पहले से ही आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं, ऐसे में यह निर्णय मनरेगा को धीरे-धीरे बंद करने की सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। इससे निर्णय प्रक्रिया का केंद्रीकरण होगा और पंचायतों की भूमिका कमजोर हो जाएगी।
कार्यक्रम के दौरान ग्रामीणों ने भी मनरेगा को बचाने और इसके अधिकारों की रक्षा के लिए एकजुट रहने का संकल्प लिया।