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कोरिया में तेज हुआ ‘बाल विवाह मुक्त भारत’ अभियान,गांव-गांव पहुंचकर पुलिस कर रही जागरूकता

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(अनुशासन और निष्पक्षता का दिया संदेश )
राजू खान :-
कोरिया/छत्तीसगढ़:। छत्तीसगढ़ शासन के निर्देशानुसार संचालित “बाल विवाह मुक्त भारत” अभियान के तहत थाना क्षेत्र पटना सहित पूरे कोरिया जिला में पुलिस द्वारा व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। अभियान का उद्देश्य समाज को बाल विवाह जैसी कुप्रथा से मुक्त करना और लोगों को कानून के प्रावधानों की जानकारी देना है।
नवागंतुक थाना प्रभारी पटना Pramod Pande के नेतृत्व में पुलिस टीम बाल विवाह रथ के माध्यम से गांव-गांव पहुंचकर आमजन को जागरूक कर रही है। इस दौरान ग्रामीणों को बाल विवाह से होने वाले सामाजिक और कानूनी दुष्परिणामों के बारे में बताया जा रहा है तथा लोगों से इस कुप्रथा को समाप्त करने में सहयोग की अपील की जा रही है।
अभियान के दौरान यह भी स्पष्ट रूप से देखने को मिल रहा है कि पुलिस केवल समाज में कानून-व्यवस्था बनाए रखने तक सीमित नहीं है, बल्कि अपने विभाग के भीतर भी अनुशासन और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। प्रायः कोरिया जिला में ऐसे उदाहरण सामने आते हैं कि यदि कोई पुलिसकर्मी अपने कर्तव्यों में लापरवाही करता है, आमजन के साथ अनुचित व्यवहार करता है या भ्रष्टाचार में लिप्त पाया जाता है, तो उसी पुलिस विभाग द्वारा उसके विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाती है।
जिस प्रकार शेर अपने ही बच्चे को भी नहीं बख्शता, उसी प्रकार पुलिस भी गलत कार्य करने वाले अपने ही अधिकारी या कर्मचारी को कानून के दायरे में लाकर दंडित करती है। यह व्यवस्था पुलिस की निष्ठा, आत्मअनुशासन और निष्पक्षता को दर्शाती है।
पुलिस का यह स्वरूप यह संदेश देता है कि कानून सबके लिए समान है—चाहे वह आम नागरिक हो या स्वयं पुलिसकर्मी। यही कारण है कि “जनता की सेवा, जनता का विश्वास” का सिद्धांत केवल नारा नहीं, बल्कि व्यवहार में भी दिखाई दे रहा है।
बाल विवाह, अवैध शराब बिक्री, कानून-व्यवस्था, सामाजिक कुरीतियों के उन्मूलन और आमजन की सुरक्षा—इन सभी क्षेत्रों में पुलिस सक्रिय भूमिका निभा रही है। पुलिस की यह निष्पक्ष कार्यप्रणाली समाज में विश्वास और सशक्तिकरण की भावना को और मजबूत कर रही है।
इस प्रकार “बाल विवाह मुक्त भारत” अभियान केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि पुलिस और समाज के संयुक्त प्रयास का सशक्त उदाहरण बनकर उभर रहा है।
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