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1 वर्ष से कार्यरत दैनिक श्रमिकों के स्थाईकरण की मांग तेज, सरकार को सौंपा गया ज्ञापन

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राजू खान :-
छत्तीसगढ़ में एक वर्ष से कार्यरत दैनिक श्रमिकों एवं संविदा कर्मियों के स्थाईकरण को लेकर दैनिक श्रमिक मोर्चा ने सरकार के समक्ष मांग तेज कर दी है। मोर्चा के प्रांतीय सचिव एच.एस. तिवारी ने राज्यपाल, मुख्यमंत्री, वित्त मंत्री, विधि एवं विधायी मंत्री तथा भाजपा प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंह देव को ज्ञापन सौंपकर स्थाईकरण योजना लागू करने की मांग की है।
ज्ञापन में बताया गया है कि मध्य प्रदेश में वर्ष 2016 और 2023 में औद्योगिक अधिनियम 1948 की धारा 61 एवं 63 के तहत स्थाईकरण योजना लागू की गई थी। वहीं राजस्थान सरकार ने वर्ष 2023 में बैकडोर एंट्री से कार्यरत दैनिक श्रमिकों एवं संविदा कर्मियों के स्थाईकरण के लिए पांच वर्ष की समय सीमा तय की थी, जिसे वर्तमान सरकार द्वारा घटाकर दो वर्ष कर दिया गया।
मोर्चा का कहना है कि जबलपुर हाईकोर्ट ने 11 अगस्त 2023 के अपने महत्वपूर्ण निर्णय में बिना रिक्त पद और बिना नियुक्ति आदेश के कार्यरत दैनिक श्रमिकों के लिए 240 दिवस कार्य अवधि के आधार पर स्थाईकरण योजना को उचित ठहराया है। इसी आधार पर छत्तीसगढ़ में “माता कौशल्या स्थाईकरण योजना” लागू कर विभागीय दैनिक वेतनभोगी लगभग 36 हजार श्रमिकों एवं पात्र हजारों संविदा कर्मियों को लाभ देने की मांग की गई है।
प्रांतीय सचिव एच.एस. तिवारी ने कहा कि अप्रैल 2026 से चार नए श्रम संहिता लागू होने जा रहे हैं, जिसके बाद वर्ष 1948 का श्रम कानून समाप्त हो जाएगा। ऐसी स्थिति में यदि समय रहते स्थाईकरण योजना लागू नहीं की गई, तो श्रमिकों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इसके साथ ही बारीक समिति में छह लाख अनियमित कर्मचारियों के प्रतिनिधित्व हेतु 30 अलग-अलग श्रेणियों के पदाधिकारियों को सदस्य बनाने की भी मांग की गई है।
मोर्चा के प्रांत प्रवक्ता सत्यम शुक्ला ने कहा कि विधानसभा चुनाव से पहले वर्तमान वित्त मंत्री ओपी चौधरी का वह वीडियो काफी चर्चित हुआ था, जिसमें उन्होंने अन्य राज्यों में लागू स्थाईकरण योजनाओं की सराहना की थी। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में वर्ष 2018 में शिक्षाकर्मियों का पहले स्थाईकरण किया गया था, जिसके बाद उनका संविलियन हुआ। उस समय संविलियन की आठ वर्ष की समय सीमा को घटाकर दो वर्ष कर सरकार ने अपने चुनावी वादे को पूरा किया था।
दैनिक श्रमिक मोर्चा ने राज्य सरकार से मांग की है कि श्रमिकों के हितों को ध्यान में रखते हुए शीघ्र स्थाईकरण योजना लागू की जाए, ताकि हजारों श्रमिकों को रोजगार मिल सके।
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